पीसीओएस और मानसिक स्वास्थ्य: 7 बड़े असर जो आप नहीं जानते

क्या आप अक्सर खुद को थका हुआ, चिड़चिड़ा या बिना वजह उदास महसूस करती हैं? अगर हाँ, तो यह सिर्फ थकान नहीं हो सकती — यह PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) के मानसिक प्रभाव भी हो सकते हैं। आज हम बात करेंगे उन 7 मानसिक प्रभावों की जो PCOS महिलाओं पर डालता है और जो अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं।
डॉ. सुनंदा साहू (BNYS), जो कि प्राकृतिक चिकित्सा और महिला स्वास्थ्य की विशेषज्ञ हैं, बताती हैं कि “PCOS सिर्फ हार्मोन का नहीं, मानसिक सेहत का भी मुद्दा है।”
1. चिंता और बेचैनी (Anxiety)
PCOS से ग्रसित महिलाएं अक्सर अनजाने डर, घबराहट और बेचैनी का अनुभव करती हैं। इसका कारण हार्मोनल असंतुलन है जो दिमाग की न्यूरोकेमिस्ट्री को प्रभावित करता है।
2. डिप्रेशन (अवसाद)
लगातार वजन बढ़ना, अनियमित पीरियड्स और शरीर में बदलाव महिलाओं को हीन भावना में डाल सकता है। यह धीरे-धीरे गंभीर डिप्रेशन का रूप ले सकता है।
3. आत्मविश्वास में गिरावट
चेहरे पर बाल, पिंपल्स और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं महिलाओं के आत्मविश्वास को बुरी तरह प्रभावित करती हैं।
4. नींद की समस्या (Insomnia)
हार्मोनल बदलाव मस्तिष्क में मेलाटोनिन लेवल को डिस्टर्ब करता है, जिससे नींद न आना आम हो जाता है।
5. सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट (Brain Fog)
PCOS से जुड़ी थकान और मानसिक दबाव के कारण फोकस करने में मुश्किल होती है, जिसे हम ब्रेन फॉग कहते हैं।
6. सोशल आइसोलेशन
अपनी स्थिति को लेकर शर्म और आत्मग्लानि के कारण महिलाएं लोगों से दूर होने लगती हैं। यह मानसिक रूप से बहुत खतरनाक हो सकता है।
7. गुस्सा और मूड स्विंग्स
PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का असंतुलन मूड को कंट्रोल करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर्स को प्रभावित करता है, जिससे गुस्सा और मूड स्विंग्स सामान्य हो जाते हैं।
डॉ. सुनंदा साहू (BNYS) कहती हैं, “PCOS का इलाज सिर्फ दवा नहीं, सही लाइफस्टाइल और मानसिक संतुलन से भी होता है।”
क्या करें?
- हर दिन कम से कम 30 मिनट वॉक या योग करें
- संतुलित आहार लें — हाई फाइबर, कम शुगर
- तनाव से बचने के लिए मेडिटेशन या ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें
- जरूरत हो तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें
- डॉ. सुनंदा साहू (BNYS) जैसी विशेषज्ञों की राय से नेचुरल और सेफ समाधान अपनाएं
नोट: यह लेख केवल जागरूकता के लिए है। अधिक जानकारी और इलाज के लिए योग्य चिकित्सक से संपर्क करें। जानकारी के लिए आप WHO या NCBI जैसी विश्वसनीय हेल्थ वेबसाइट्स पर जा सकते हैं।
लेखिका: डॉ. सुनंदा साहू (BNYS)