डायबिटीज के लिए इंसुलिन जरूरी है क्या?
लेखिका: Sunanda Sahu (BNYS)

डायबिटीज यानी मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में ब्लड शुगर का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है। बहुत से मरीजों का सवाल होता है कि क्या डायबिटीज में इंसुलिन लेना जरूरी है या नहीं?
इंसुलिन क्या है?
इंसुलिन एक हार्मोन है जो पैंक्रियास द्वारा बनाया जाता है। इसका काम शरीर में ब्लड शुगर को ऊर्जा में बदलने में मदद करना होता है। जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या उस पर प्रतिक्रिया नहीं करता, तो ब्लड शुगर बढ़ जाता है।
क्या हर डायबिटीज मरीज को इंसुलिन लेना पड़ता है?
नहीं, हर मरीज को इंसुलिन की आवश्यकता नहीं होती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को टाइप 1 डायबिटीज है या टाइप 2:
- टाइप 1 डायबिटीज: इसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, इसलिए इंसुलिन लेना जरूरी होता है।
- टाइप 2 डायबिटीज: इसमें इंसुलिन की आवश्यकता मरीज की हालत, ब्लड शुगर के स्तर और अन्य उपचारों पर निर्भर करती है। कई बार दवाएं और लाइफस्टाइल में बदलाव से भी कंट्रोल हो जाता है।
Sunanda Sahu की राय:
BNYS डॉक्टर Sunanda Sahu कहती हैं, “हर डायबिटीज मरीज को इंसुलिन देने की जरूरत नहीं होती। टाइप 2 डायबिटीज में अगर शुगर दवाओं और खानपान से कंट्रोल हो रही हो, तो इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन यदि ब्लड शुगर लगातार हाई बना रहता है, तो डॉक्टर इंसुलिन शुरू करने की सलाह दे सकते हैं।”
इंसुलिन का डर क्यों?
बहुत से मरीज इंसुलिन लेने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि एक बार शुरू करने के बाद जिंदगीभर लेना पड़ेगा। लेकिन सच यह है कि इंसुलिन का उपयोग तभी किया जाता है जब दवाओं और डाइट से शुगर कंट्रोल में नहीं रहती। सही समय पर इंसुलिन लेना शरीर को नुकसान से बचा सकता है।
निष्कर्ष:
इंसुलिन एक जीवन रक्षक उपचार है, लेकिन सभी को इसकी जरूरत नहीं होती। डायबिटीज की सही जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इंसुलिन शुरू करना चाहिए। स्वयं से कभी भी इंसुलिन शुरू या बंद न करें।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी इलाज को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।