टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में फर्क

डायबिटीज़ आज की दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती बीमारियों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज़ सिर्फ एक ही प्रकार की नहीं होती? टाइप 1 और टाइप 2 – ये दोनों प्रकार हैं, जो एक-दूसरे से बहुत अलग होते हैं – कारण, लक्षण, इलाज और नियंत्रण के तरीके में भी।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़ में क्या फर्क है और किसे कौन सी सावधानी बरतनी चाहिए।
“डायबिटीज़ के दोनों प्रकार अलग हैं, और उन्हें समझना इलाज से ज्यादा जरूरी है। सही जानकारी ही बचाव है।” — डॉ. सुनंदा साहू (BNYS)
टाइप 1 डायबिटीज़ क्या है?
टाइप 1 डायबिटीज़ एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) अपनी ही पैंक्रियास की बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देती है, जिससे इंसुलिन बनना बंद हो जाता है।
- आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में होती है
- शरीर खुद इंसुलिन बनाना बंद कर देता है
- हर दिन इंसुलिन इंजेक्शन लेना जरूरी
- तेजी से वजन घटना, अत्यधिक प्यास लगना, थकावट
टाइप 2 डायबिटीज़ क्या है?
टाइप 2 डायबिटीज़ इंसुलिन रेसिस्टेंस के कारण होती है, जिसमें शरीर तो इंसुलिन बनाता है, लेकिन शरीर की कोशिकाएं उस पर ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करतीं। यह अधिकतर उम्रदराज़ लोगों में देखी जाती है।
- अधिक वजन, तनाव, खराब खानपान इसका कारण
- लाइफस्टाइल और डाइट से कंट्रोल संभव
- शुरुआती अवस्था में दवा या सप्लिमेंट से नियंत्रण संभव
- कभी-कभी इंसुलिन की ज़रूरत होती है
मुख्य अंतर सारांश में
| विशेषता | टाइप 1 डायबिटीज़ | टाइप 2 डायबिटीज़ |
|---|---|---|
| शुरुआत की उम्र | बचपन / किशोरावस्था | 40 की उम्र के बाद (कभी-कभी पहले भी) |
| इंसुलिन उत्पादन | शरीर बंद कर देता है | शरीर बनाता है लेकिन ठीक से इस्तेमाल नहीं होता |
| इलाज | इंसुलिन इंजेक्शन अनिवार्य | डाइट, एक्सरसाइज़, दवा |
| रोकथाम संभव? | नहीं | हां, सही जीवनशैली से |
टाइप 1 डायबिटीज़ के जोखिम कारक
– जेनेटिक फैक्टर
– वायरल संक्रमण
– ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया
टाइप 2 डायबिटीज़ के जोखिम कारक
– मोटापा
– शारीरिक निष्क्रियता
– तनाव
– अधिक फास्ट फूड और मीठे पदार्थों का सेवन
– पारिवारिक इतिहास
Dr. Sunanda Sahu की सलाह:
यदि आपको बार-बार प्यास लग रही है, बार-बार पेशाब हो रहा है, वजन कम हो रहा है या बहुत थकावट महसूस हो रही है — तो तुरंत ब्लड शुगर टेस्ट कराएं। अगर डायबिटीज़ की पुष्टि हो तो सही प्रकार समझना बेहद जरूरी है क्योंकि इलाज की दिशा टाइप पर निर्भर करती है।
क्या दोनों डायबिटीज़ का इलाज संभव है?
टाइप 1 डायबिटीज़ को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन इंसुलिन थेरेपी से इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है। वहीं टाइप 2 डायबिटीज़ को जीवनशैली, आहार और योग से काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है — कुछ मामलों में तो दवा की ज़रूरत भी नहीं पड़ती।
निष्कर्ष
टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़ में जमीन-आसमान का फर्क है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को डायबिटीज़ है, तो यह जानना अनिवार्य है कि कौन सा प्रकार है, ताकि उसका सही और समय पर इलाज हो सके।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ जागरूकता के लिए है। डायबिटीज़ का प्रकार और इलाज निर्धारित करने के लिए अपने डॉक्टर या किसी योग्य BNYS विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।