कौन सी दाल डायबिटीज को बढ़ा सकती है?

दालें भारतीय खानपान का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन्स भरपूर मात्रा में होते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ दालें डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदायक भी हो सकती हैं?
क्या दालें शुगर लेवल को प्रभावित करती हैं?
जी हां। हर दाल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) अलग होता है। जो दालें हाई GI वाली होती हैं, वे शरीर में जल्दी ग्लूकोज में बदल जाती हैं जिससे शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है।
यह दाल हो सकती है ज़हर डायबिटीज मरीजों के लिए
अरहर की दाल (Toor Dal) – इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम से उच्च श्रेणी में आता है (लगभग 47–52)। कुछ डायबिटिक मरीजों में यह तेजी से शुगर लेवल बढ़ा सकती है, खासकर जब इसे बिना फाइबर वाली रोटी या चावल के साथ खाया जाए।
कौन-कौन सी दालें सुरक्षित हैं?
- मूंग दाल: इसका GI बहुत कम होता है (लगभग 30), जिससे यह डायबिटीज मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
- चना दाल: इसमें फाइबर ज्यादा होता है और यह धीरे-धीरे शुगर रिलीज करती है।
- मसूर दाल: यह भी कम GI वाली होती है और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने में मदद करती है।
डॉ. सुनंदा साहू (BNYS) की सलाह
डॉ. सुनंदा साहू, जो कि एक अनुभवी नैचुरोपैथ और डायबिटीज एक्सपर्ट हैं, बताती हैं, “दालों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। हमेशा लो GI वाली दालें ही खाएं। साथ ही दाल को फाइबर और सब्ज़ियों के साथ लेना ब्लड शुगर कंट्रोल करने में सहायक होता है।”
कुछ अतिरिक्त सुझाव:
- दालों को अधिक पकाकर न खाएं, इससे उनका GI बढ़ सकता है।
- दालों के साथ हरी सब्जियाँ ज़रूर खाएं।
- दाल के साथ साबुत अनाज की रोटी (जैसे जौ या बाजरे की रोटी) का सेवन करें।
निष्कर्ष
हर दाल डायबिटीज के लिए फायदेमंद नहीं होती। अरहर जैसी दालें कुछ लोगों में शुगर लेवल बढ़ा सकती हैं। जबकि मूंग, मसूर और चना दाल शुगर कंट्रोल में सहायक होती हैं। दालों का सेवन करते समय संतुलन और सही चयन बेहद जरूरी है।
Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य ज्ञान के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी तरह का इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह अवश्य लें।