डायबिटीज में Fasting करना सही है या नहीं?

डायबिटीज के मरीजों के लिए फास्टिंग यानी उपवास रखना एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। कई बार मरीज सोचते हैं कि उपवास करने से शुगर कंट्रोल में आ जाएगी, लेकिन यह हर किसी के लिए सही नहीं होता। इस लेख में हम जानेंगे कि डायबिटीज में फास्टिंग करना सही है या नहीं, और अगर करना है तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
फास्टिंग के संभावित फायदे
- फास्टिंग से शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हो सकती है।
- वजन कम करने में मदद मिल सकती है, जो टाइप 2 डायबिटीज में बेहद फायदेमंद है।
- कुछ स्टडीज के अनुसार इंटरमिटेंट फास्टिंग से ब्लड शुगर लेवल बेहतर होता है।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
डॉ. सुनंदा साहू (BNYS) के अनुसार, “डायबिटीज के हर मरीज को फास्टिंग नहीं करनी चाहिए। खासकर जिनका शुगर लेवल बहुत असंतुलित रहता है, या जो इंसुलिन पर निर्भर हैं, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के उपवास नहीं करना चाहिए।”
निम्नलिखित स्थिति वाले लोग फास्टिंग से बचें:
- टाइप 1 डायबिटीज
- गर्भवती महिलाएं
- हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर) का इतिहास
- बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग
फास्टिंग करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
- फास्टिंग से पहले और बाद में ब्लड शुगर लेवल जरूर चेक करें।
- खाली पेट रहते हुए भी पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहें।
- फास्टिंग तोड़ते समय हाई शुगर फूड जैसे मिठाई, सफेद ब्रेड या मीठे जूस से बचें।
- शरीर में कमजोरी या चक्कर आए तो तुरंत फास्ट तोड़ें।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
डॉ. साहू का मानना है कि “अगर कोई डायबिटिक पेशेंट इंटरमिटेंट फास्टिंग को अपनाना चाहता है तो उसे पहले अपने ब्लड शुगर की प्रोफाइल देखनी चाहिए और डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। सही गाइडेंस में किया गया उपवास कुछ मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है।”
निष्कर्ष
डायबिटीज में फास्टिंग करना कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन यह हर मरीज के लिए नहीं है। बिना डॉक्टर की सलाह के इसे अपनाना खतरनाक हो सकता है। इसलिए पहले मेडिकल काउंसलिंग लें और फिर ही किसी भी प्रकार की फास्टिंग शुरू करें।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी प्रकार की डायबिटीज संबंधित सलाह के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। लेख में दी गई जानकारी डॉक्टर सुनंदा साहू (BNYS) के अनुभव और रिसर्च पर आधारित है।