क्या डायबिटीज में आयुर्वेदिक इलाज बेहतर है?

डायबिटीज (मधुमेह) एक ऐसा रोग है जो जीवनभर के अनुशासन और निगरानी की मांग करता है। बहुत से लोग अब इस सवाल पर विचार करते हैं — “क्या डायबिटीज में आयुर्वेदिक इलाज बेहतर है?” इस विषय पर डॉ. सुनंदा साहू (BNYS) की राय बेहद संतुलित और वैज्ञानिक है।
आयुर्वेदिक इलाज की भूमिका
- आयुर्वेद मधुमेह को “मधुमेह” रोग के नाम से जानता है, जिसे वात, पित्त और कफ के असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है।
- विभिन्न जड़ी-बूटियां जैसे जामुन, गुड़मार, मेथी, करेला, नीम आदि का उपयोग ब्लड शुगर नियंत्रित करने में किया जाता है।
- आयुर्वेदिक दवाएं शरीर की प्राकृतिक क्षमता को पुनः सक्रिय करने का प्रयास करती हैं।
- सही डाइट, योग, प्राणायाम और दिनचर्या भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
डॉ. सुनंदा साहू की सलाह
- अगर ब्लड शुगर हल्के स्तर पर बढ़ा हुआ है या प्री-डायबिटिक स्थिति है, तो आयुर्वेदिक उपाय कारगर हो सकते हैं।
- मध्यम से गंभीर डायबिटीज में आयुर्वेदिक इलाज सहायक (supportive) रूप में किया जाना चाहिए, पूरी तरह दवाएं बंद करने के बजाय।
- आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्स भी शरीर पर धीमा लेकिन स्थायी प्रभाव डालते हैं, जिससे शुगर नियंत्रण में रह सकती है।
सावधानियां
- कोई भी आयुर्वेदिक दवा बिना विशेषज्ञ की सलाह के न लें, खासकर अगर आप पहले से एलोपैथिक दवाएं ले रहे हों।
- ब्लड शुगर की नियमित जांच करते रहें, ताकि किसी दवा या हर्बल उपाय का असर मापा जा सके।
- ऑनलाइन बिक रही बिना ब्रांड की जड़ी-बूटियों से बचें।
निष्कर्ष
आयुर्वेदिक इलाज डायबिटीज में लाभदायक हो सकता है, बशर्ते वह अनुशासन और विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाए। डॉ. सुनंदा साहू कहती हैं – “आयुर्वेद में समाधान है, लेकिन समझदारी और संतुलन जरूरी है।”
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी दवा या उपचार की शुरुआत डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।