क्या PCOS महिलाओं की काम करने की क्षमता को कम कर देता है? जानिए इसके पीछे की सच्चाई

क्या आपने कभी सोचा है कि अचानक ऑफिस में आपकी एनर्जी कम क्यों हो गई है? हर काम बोझ जैसा क्यों लगने लगा है? अगर आप PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) से जूझ रही हैं, तो इसकी वजह आपकी वर्किंग कैपेसिटी में गिरावट हो सकती है।
डॉ. सुनंदा साहू, जो महिलाओं के हार्मोनल हेल्थ पर शोध करती हैं, कहती हैं: “PCOS केवल पीरियड्स की समस्या नहीं है, यह आपकी फिजिकल और मेंटल एनर्जी दोनों को प्रभावित करता है।”
PCOS और वर्क परफॉर्मेंस का कनेक्शन
PCOS का असर सिर्फ शरीर पर नहीं, दिमाग पर भी होता है। ऑफिस या घर में काम करते समय…
- ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता
- हर समय थकान महसूस होती है
- मूड स्विंग्स के कारण टीम वर्क प्रभावित होता है
- नींद पूरी नहीं होने से दिमाग धीमा हो जाता है
डेली कामकाज में क्या-क्या दिक्कतें आती हैं?
1. सुबह उठकर काम पर जाने की इच्छा नहीं होती। 2. Zoom मीटिंग के दौरान लगातार गड़बड़ हो जाती है। 3. मल्टीटास्किंग असंभव लगने लगता है। 4. क्रिएटिव सोचने की क्षमता कम हो जाती है।
डॉ. सुनंदा साहू की सलाह: कैसे लौटे काम में फुल फोकस?
1. अपने शरीर की सुनो, जबरदस्ती मत करो
“PCOS में कभी-कभी बॉडी ब्रेक माँगती है। उसे इग्नोर मत करो,” कहती हैं डॉ. साहू। थोड़ी देर आराम लेने से आपकी कार्य क्षमता बेहतर हो सकती है।
2. फूड ऑन टाइम: दिमाग और शरीर को एनर्जी दो
हर 3-4 घंटे में हल्का और संतुलित खाना लें – जैसे फल, सूखे मेवे और प्रोटीन रिच स्नैक्स।
3. PCOS जर्नलिंग शुरू करें
अपने थकान और मूड स्विंग्स को ट्रैक करने से आपको पैटर्न समझ आएगा। फिर आप ऑफिस शेड्यूल को उसी के अनुसार प्लान कर सकती हैं।
4. टास्क को छोटे हिस्सों में बांटे
एक बड़ा टास्क देखकर डरने के बजाय उसे छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ लें। इससे आपकी प्रोडक्टिविटी बनी रहेगी।
5. ऑफिस में खुलकर बात करें
अगर आप वर्क फ्रॉम होम कर रही हैं या ऑफिस जा रही हैं, तो अपने बॉस या कलीग्स से अपनी हेल्थ कंडीशन को लेकर बातचीत करें। इससे वे भी सपोर्टिव रहेंगे।
क्या PCOS को हराकर प्रोडक्टिव बना जा सकता है?
बिलकुल! हजारों महिलाएं जो PCOS से पीड़ित थीं, आज मैनेजमेंट, टीचिंग, डिजाइनिंग और एंटरप्रेन्योरशिप में बेहतरीन काम कर रही हैं। बस आपको अपनी हेल्थ को उतनी ही प्राथमिकता देनी है जितनी डेडलाइन्स को देती हैं।
निष्कर्ष
PCOS कोई हार नहीं है। यह आपके जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन पूरा जीवन नहीं। अपने शरीर को समझें, खुद को वक्त दें, और धीरे-धीरे फिर से अपनी वर्क कैपेसिटी को लौटाएं। थकान आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि शरीर की एक भाषा है — उसे सुनिए।
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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। कृपया किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।