डायबिटीज में इन्सुलिन कब जरूरी हो जाता है?

डायबिटीज का इलाज केवल गोली या खान-पान से ही नहीं होता। कई बार इंसुलिन लेना भी जरूरी हो जाता है। लेकिन सवाल यह है कि इंसुलिन की जरूरत कब पड़ती है और क्या यह आखिरी विकल्प होता है?
इन्सुलिन की जरूरत क्यों पड़ती है?
जब आपके शरीर का पैंक्रियास पर्याप्त इंसुलिन बनाना बंद कर देता है या कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति रिस्पॉन्ड नहीं करतीं, तब ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति में इंसुलिन इंजेक्शन द्वारा शरीर को वो जरूरी इंसुलिन दिया जाता है जो वो खुद नहीं बना पा रहा।
इन संकेतों पर दें ध्यान:
- ब्लड शुगर लगातार 300 mg/dL से ऊपर रहना
- थकान, भूख और बार-बार पेशाब की शिकायत बनी रहना
- वज़न तेजी से घटता जाना
- आंखों की रोशनी कमजोर होना
- पैरों में झनझनाहट या जलन
डॉ. सुनंदा साहू (BNYS) की सलाह:
प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. Sunanda Sahu (BNYS) कहती हैं कि “हर डायबिटिक मरीज को इंसुलिन की जरूरत नहीं होती। लेकिन जब खानपान और दवा से भी शुगर कंट्रोल नहीं होता, तब इंसुलिन जरूरी हो जाता है। शुरुआत में कम डोज़ से इसकी आदत डालना बेहतर होता है।”
इन्सुलिन लेने के फायदे
- तेजी से ब्लड शुगर कंट्रोल करता है
- ऑर्गन डैमेज से बचाव करता है
- शरीर की कमजोरी को रोकता है
क्या इन्सुलिन लेने से बीमारी बढ़ती है?
बिलकुल नहीं। ये एक मिथक है। इंसुलिन केवल शरीर को सहायता देता है शुगर नियंत्रित रखने में। इसे सही समय पर लेना फायदे का सौदा है।
क्या इंसुलिन की आदत पड़ जाती है?
डॉ. सुनंदा साहू के अनुसार, “अगर आप सही खानपान और एक्सरसाइज के साथ लाइफस्टाइल में सुधार लाते हैं तो इंसुलिन से छुटकारा भी पाया जा सकता है। ये स्थायी नहीं है, लेकिन इसे अनदेखा करना खतरनाक साबित हो सकता है।”
निष्कर्ष:
डायबिटीज में इंसुलिन तब जरूरी होता है जब बाकी उपाय असफल हो जाएं। इसे एक सहायक इलाज की तरह देखें, न कि अंतिम विकल्प के रूप में। सही सलाह, नियमित टेस्ट और लाइफस्टाइल सुधार से आप एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख केवल जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी दवा या उपचार को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लें।