शुगर को कैसे ठीक करें – डॉ. सुनंदा साहू (BNYS डॉक्टर) की सलाह

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क्या शुगर (डायबिटीज़) को जड़ से ठीक किया जा सकता है? क्या इंसुलिन से छुटकारा मिल सकता है? क्या हम अपनी ज़िंदगी को बिना दवाइयों के फिर से सामान्य बना सकते हैं? ऐसे ही ज्वलंत सवालों का जवाब हमें मिला भारत की जानी-मानी नेचुरोपैथी और योग चिकित्सक डॉ. सुनंदा साहू (BNYS) से, जिन्होंने हज़ारों डायबिटिक रोगियों को दवाओं से मुक्त किया है, केवल जीवनशैली में बदलाव और प्राकृतिक उपायों के जरिए।
डॉ. साहू बताती हैं कि शुगर कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। यह एक “Silent Lifestyle Disorder” है, जो वर्षों की गलत आदतों और तनाव का नतीजा होता है। इसलिए इसका इलाज भी केवल गोली या इंसुलिन नहीं, बल्कि जड़ में जाकर करना होगा।
“अगर हम शरीर को प्राकृतिक जीवनशैली दें, तो वह खुद अपनी चिकित्सा कर सकता है। शुगर कोई सज़ा नहीं है, यह एक संकेत है – बदलाव का।” – डॉ. सुनंदा साहू (BNYS)
आयुर्वेद, नेचुरोपैथी और योग के मिश्रण से वे एक ऐसा सिस्टम विकसित करती हैं, जिसमें ना सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल होता है, बल्कि शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
जीवनशैली में संतुलन: पहला कदम
शुगर कंट्रोल करने की शुरुआत होती है हमारी दिनचर्या से। यदि हम समय पर उठें, सूरज की रोशनी लें, समय पर खाना खाएं और गहरी नींद लें, तो शरीर खुद इंसुलिन को बैलेंस करने लगता है। रात को 10 बजे के बाद जागना और सुबह देर से उठना सबसे बड़ा नुकसान करता है – खासकर डायबिटिक शरीर में।
भोजन को बनाएं औषधि
डॉ. साहू कहती हैं, “आप जो खाते हैं, वही आपकी दवा या ज़हर बन सकता है।” इसलिए वह सफेद चीनी, मैदा, ब्रेड, रिफाइंड ऑयल्स और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज की सलाह देती हैं। इनके स्थान पर भिगोई हुई मेथी, गिलोय, तुलसी, जौ का सूप, अंकुरित अनाज, और मौसमी हरी सब्जियाँ अत्यंत लाभकारी होती हैं।
तनाव: छुपा हुआ दुश्मन
जब व्यक्ति तनाव में होता है, तब शरीर “कोर्टिसोल” नामक हॉर्मोन छोड़ता है जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाता है। इसलिए वह योग, ध्यान और सुबह-सुबह सूरज की किरणों में बैठने का सुझाव देती हैं। विशेषकर “अनुलोम-विलोम” और “भ्रामरी” प्राणायाम उनके उपचार कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
शरीर को चलायमान बनाएं
हर दिन 30-45 मिनट की वॉक, सूर्य नमस्कार, स्क्वैट्स और हल्का योग शरीर को इंसुलिन के प्रति संवेदनशील बनाते हैं। इससे खून में मौजूद ग्लूकोज का उपयोग बेहतर होता है और ब्लड शुगर तेजी से सामान्य हो जाता है।
प्राकृतिक चिकित्सा ही असली समाधान है
डॉ. साहू का मानना है कि आधुनिक दवाएं केवल शुगर को दबाती हैं, लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा उसे जड़ से ठीक करती है। कई रोगी जो वर्षों से इंसुलिन ले रहे थे, वे 3 से 6 महीनों में बिना दवा के नार्मल जीवन जीने लगे।
निष्कर्ष
शुगर को जड़ से ठीक करने का कोई जादू नहीं है, लेकिन एक सच्चा समाधान है – प्राकृतिक जीवनशैली और आत्म-नियंत्रण। डॉ. सुनंदा साहू जैसी BNYS डॉक्टरों की सलाह और मार्गदर्शन से लाखों लोग आज फिर से स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। यदि आप भी इस रास्ते पर चलने को तैयार हैं, तो बदलाव आज से ही शुरू कीजिए।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी नई जीवनशैली या चिकित्सा प्रणाली को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या प्रमाणित BNYS चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।