डायबिटीज कंट्रोल के लिए माइंडफुल ईटिंग क्या होती है?

क्या आप खाने के दौरान मोबाइल या टीवी देखते हैं? क्या आप बहुत तेजी से खाना खा लेते हैं या भूख न लगने पर भी खा लेते हैं? अगर हां, तो यह आदतें आपके ब्लड शुगर को बिगाड़ सकती हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए “माइंडफुल ईटिंग” एक बेहद असरदार तकनीक है जो बिना दवा के शुगर कंट्रोल करने में मदद कर सकती है।
माइंडफुल ईटिंग का मतलब क्या होता है?
माइंडफुल ईटिंग का मतलब है – हर निवाले को ध्यान से खाना, स्वाद को महसूस करना और शरीर की भूख-प्यास के संकेतों को समझना। यह कोई डाइट प्लान नहीं, बल्कि खाने की आदतों में बदलाव है।
डायबिटीज में माइंडफुल ईटिंग क्यों जरूरी है?
- इससे ओवरईटिंग कम होती है, जो शुगर को बढ़ाती है।
- यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारती है।
- तनाव कम होता है जो डायबिटीज के लिए खतरनाक है।
- खाने का सही समय और मात्रा तय करना आसान हो जाता है।
कैसे करें माइंडफुल ईटिंग?
डॉ. सुनंदा साहू (BNYS) के अनुसार माइंडफुल ईटिंग के लिए इन स्टेप्स को अपनाएं:
- खाने से पहले 2 मिनट शांत बैठें और 2 डीप ब्रीद लें।
- हर निवाले को 25-30 बार चबाएं।
- टीवी, मोबाइल या बातचीत से बचें।
- भूख लगने पर ही खाएं, सिर्फ स्वाद के लिए नहीं।
- ध्यान दें कि पेट 70-80% भरते ही रुक जाएं।
कितने दिनों में दिखेगा असर?
अगर आप नियमित रूप से माइंडफुल ईटिंग को अपनाते हैं, तो लगभग 3-4 हफ्तों में शुगर लेवल में सुधार देखने को मिल सकता है। कई मरीजों को वजन घटाने और थकान कम होने जैसे फायदे भी नजर आते हैं।
निष्कर्ष
माइंडफुल ईटिंग ना सिर्फ डायबिटीज बल्कि वजन, नींद और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। आप इसे किसी भी डाइट के साथ अपना सकते हैं। याद रखिए, हम क्या खाते हैं, उससे ज्यादा जरूरी है कि कैसे खाते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार की बीमारी के इलाज या दवा शुरू/बंद करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य चिकित्सा विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। Dr. Sunanda Sahu (BNYS) का उल्लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से किया गया है।