क्या PCOS से डिप्रेशन होता है? चौंकाने वाला अध्ययन!

क्या आप अक्सर खुद को थका हुआ, उदास और बिना कारण निराश महसूस करती हैं? अगर आप PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) से जूझ रही हैं, तो यह सिर्फ हार्मोन या वजन की नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की भी बात है।
Dr. Sunanda Sahu (BNYS) कहती हैं, “PCOS से ग्रसित महिलाओं में डिप्रेशन और एंग्जायटी की संभावना सामान्य महिलाओं की तुलना में 3 गुना अधिक होती है।” हाल ही में हुए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस तथ्य को और भी मजबूत कर दिया है।
PCOS और मानसिक स्वास्थ्य: क्या है कनेक्शन?
PCOS केवल शरीर के बाहर दिखने वाले लक्षणों (जैसे मुहांसे, अनियमित पीरियड्स, बाल झड़ना) तक सीमित नहीं है। यह अंदर से आपके मूड और भावनाओं को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।
आइए समझते हैं कैसे:
- हार्मोनल असंतुलन: PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन का स्तर गड़बड़ा जाता है, जिससे मूड स्विंग्स और चिंता की समस्या बढ़ जाती है।
- शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस: यह मस्तिष्क के न्यूरोकेमिकल्स को प्रभावित करता है जो खुशी और संतुलन के लिए ज़रूरी होते हैं।
- स्वयं की छवि (Self-Image): बढ़ता वजन, चेहरे पर बाल या मुहांसे महिला के आत्मविश्वास को गहरा आघात देते हैं।
- क्रॉनिक स्ट्रेस: लगातार थकान और हार्मोनल असंतुलन से शरीर हमेशा स्ट्रेस मोड में रहता है।
शोध क्या कहता है?
2022 में Journal of Affective Disorders में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, PCOS से पीड़ित 60% महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षण पाए गए। इनमें से कई महिलाओं को यह तक नहीं पता था कि उनका मानसिक स्वास्थ्य पीसीओएस से जुड़ा हुआ है।
Dr. Sunanda Sahu (BNYS) की सलाह:
- रोज योग और प्राणायाम: खासकर “अनुलोम विलोम” और “भ्रामरी” मानसिक शांति के लिए लाभकारी हैं।
- डिजिटल डिटॉक्स: सोशल मीडिया से दूरी बनाएं और खुद को तुलना से बचाएं।
- जर्नलिंग: रोज 5 मिनट लिखें कि आपने क्या महसूस किया और किसके लिए आप आभारी हैं।
- संगत का असर: पॉजिटिव और सहयोगी लोगों के साथ समय बिताएं।
- प्राकृतिक उपचार: अश्वगंधा, शंखपुष्पी और ब्राह्मी जैसे आयुर्वेदिक हर्ब्स भी तनाव कम करने में सहायक हैं (लेकिन डॉक्टर की सलाह से लें)।
अगर आप मदद मांगें, तो कमजोरी नहीं
कई महिलाएं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करती हैं। लेकिन PCOS के इलाज में मानसिक स्थिति को नजरअंदाज करना बहुत बड़ी गलती हो सकती है।
Dr. Sunanda Sahu कहती हैं, “अगर आप नियमित रूप से उदासी, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, या जीवन में रुचि की कमी महसूस कर रही हैं, तो एक बार काउंसलिंग जरूर लें।”
निष्कर्ष
PCOS सिर्फ एक शारीरिक बीमारी नहीं है। इसका मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव होता है। लेकिन सही मार्गदर्शन, जीवनशैली में बदलाव, और थोड़ी सी जागरूकता से आप इस साइलेंट संघर्ष से बाहर निकल सकती हैं।
आप अकेली नहीं हैं — और इस लड़ाई में आप कमजोर नहीं, बल्कि बहुत मजबूत हैं।
लेखिका: Dr. Sunanda Sahu (BNYS)