मोटापा घटाने के लिए आयुर्वेदिक रहस्य – डॉ. सुनंदा साहू के अनुभव से जानिए

भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति – आयुर्वेद, ना सिर्फ बीमारियों को दूर करता है बल्कि शरीर के संपूर्ण संतुलन को बनाए रखता है। आयुर्वेद में मोटापा सिर्फ शारीरिक फैट नहीं, बल्कि असंतुलित जीवनशैली और खराब पाचन का परिणाम माना जाता है। डॉ. सुनंदा साहू कहती हैं कि यदि दिनचर्या, भोजन और मानसिक स्थिति को संतुलित कर दिया जाए तो मोटापा खुद ही दूर भागता है।
उनके अनुसार, सुबह का समय शरीर को शुद्ध करने का सबसे सही समय होता है। इस समय नीम, गिलोय और त्रिफला का सेवन शरीर को डिटॉक्स करता है और पाचन को मजबूत करता है। खासकर जिन लोगों का वजन लगातार बढ़ रहा हो, उन्हें गिलोय के रस और त्रिफला चूर्ण को गर्म पानी के साथ लेना चाहिए। इससे शरीर की चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है और पाचन अग्नि तेज हो जाती है।

भोजन के समय भी कुछ नियम अपनाने से मोटापा जल्दी नियंत्रित होता है। जैसे कि खाना खाते समय ध्यान लगाकर खाना चाहिए, ज्यादा बोलना या टीवी देखते हुए खाना नहीं। इससे दिमाग को भोजन पचाने के संकेत समय पर मिलते हैं और पेट जल्दी भरने लगता है।
डॉ. साहू का यह भी मानना है कि स्ट्रेस भी मोटापे का बड़ा कारण है। जो लोग लगातार तनाव में रहते हैं, उनका शरीर कोर्टिसोल नामक हार्मोन रिलीज करता है जो शरीर में फैट जमा करता है। ऐसे में रोज़ कम से कम 10 मिनट मेडिटेशन या ध्यान करना बेहद फायदेमंद होता है।

एक और अनमोल सलाह जो डॉ. साहू सभी को देती हैं – वह है “धीरे खाएं, स्वस्थ खाएं, समय पर खाएं।” खाना जितना जल्दी खाएंगे, पेट उतना जल्द भरेगा और आप ओवरईटिंग से बचेंगे। शरीर खुद संकेत देता है कब खाना बंद करना है, बस आपको उसे सुनना सीखना है।
यदि इन छोटे-छोटे आयुर्वेदिक बदलावों को जीवन में शामिल कर लिया जाए, तो ना केवल मोटापा कम होगा, बल्कि आपकी ऊर्जा, त्वचा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। मोटापा सिर्फ शरीर पर नहीं, आत्मा पर भी असर डालता है। इसलिए उसे खत्म करने के लिए आयुर्वेद अपनाइए – नेचुरली, धीरे और स्थायी रूप से।
Disclaimer: यह लेख आयुर्वेदिक जानकारी पर आधारित है। कोई भी उपाय अपनाने से पहले अपने चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लें।