क्या गिलोय रस वाकई शुगर कंट्रोल करता है?

गिलोय (Tinospora Cordifolia) को आयुर्वेद में ‘अमृता’ कहा गया है, जिसका अर्थ है – अमरता देने वाली। यह सदियों से आयुर्वेद में बुखार, इम्युनिटी और कई रोगों के लिए इस्तेमाल होती रही है। लेकिन क्या यह वाकई डायबिटीज यानी शुगर को कंट्रोल करने में कारगर है?
गिलोय रस और डायबिटीज का संबंध
गिलोय में ऐसे यौगिक (compounds) पाए जाते हैं जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं और इंसुलिन की क्रिया को मजबूत करते हैं। यह ब्लड ग्लूकोज़ के स्तर को प्राकृतिक रूप से कम करने में मदद कर सकता है।
गिलोय रस के संभावित फायदे
- इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है
- ब्लड शुगर को नेचुरल तरीके से कम करता है
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत बनाता है
- डाइजेशन सुधारता है जिससे शुगर लेवल पर प्रभाव पड़ता है
कैसे लें गिलोय रस?
- सुबह खाली पेट 10–15ml गिलोय रस को गुनगुने पानी में मिलाकर पिएं
- रोजाना लेने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं
- गिलोय की गोली या कैप्सूल का भी उपयोग किया जा सकता है
वैज्ञानिक क्या कहते हैं?
कुछ रिसर्च और स्टडीज में पाया गया है कि गिलोय में एंटीहाइपरग्लाइसेमिक गुण होते हैं, जो ब्लड शुगर को कम करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, ये अध्ययन सीमित स्तर पर हुए हैं और इसके लिए और शोध की आवश्यकता है।
सावधानियाँ:
- यदि आप पहले से डायबिटीज की दवा ले रहे हैं, तो गिलोय रस लेने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
- गिलोय शुगर लेवल को और भी कम कर सकता है, जिससे हाइपोग्लाइसीमिया (low sugar) का खतरा हो सकता है।
- प्रेग्नेंट और स्तनपान कराने वाली महिलाएं इसका सेवन डॉक्टर की अनुमति से ही करें।
निष्कर्ष:
गिलोय रस आयुर्वेदिक चिकित्सा में एक चमत्कारी औषधि के रूप में जाना जाता है और इसमें डायबिटीज को कंट्रोल करने की क्षमता भी हो सकती है। लेकिन यह दवा का विकल्प नहीं है। यदि आप इसका प्रयोग करना चाहते हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। कृपया किसी भी आयुर्वेदिक उत्पाद या उपाय को आज़माने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।